HINDUISM AND SANATAN DHARMA

Hinduism,Cosmos ,Sanatan Dharma.Ancient Hinduism science.

विदेशी कैलेंडर, Gregorian Calender

विदेशी_कैलेंडर.

कैलेंडर यानी समय विभाजन का तरीका-वर्ष, मास, दिन, का आधार, पृथ्वी की गति और चन्द्र की गति के आधार पर करना। लैटिन में Moon के लिए Luna शब्द है, अत: Lunar Month कहते हैं। लैटिन में Sun के लिए Sol शब्द है, अत: Solar Year वर्ष कहते हैं। आजकल इसका माप 365 दिन 5 घंटे 48 मिनिट व 46 सेकेण्ड है। चूंकि सौर वर्ष और चन्द्रमास का तालमेल नहीं है, अत: अनेक देशों में गड़बड़ रही।

समय का विभाजन ऐतिहासिक घटना के आधार पर करना। ईसाई मानते हैं कि ईसा का जन्म इतिहास की निर्णायक घटना है, इस आधार पर इतिहास को वे दो हिस्सों में विभाजित करते हैं। एक बी.सी. तथा दूसरा ए.डी.। B.C. का अर्थ है Before Christ – यह ईसा के उत्पन्न होने से पूर्व की घटनाओं पर लागू होता है। जो घटनाएं ईसा के जन्म के बाद हुर्इं उन्हें A.D. कहा जाता है जिसका अर्थ है Anno Domini अर्थात् In the year of our Lord. यह अलग बात है कि यह पद्धति ईसा के जन्म के बाद कुछ सदी तक प्रयोग में नहीं आती थी।

रोमन_कैलेण्डर-आज के ई। सन् का मूल रोमन संवत् है जो ईसा के जन्म से 753 वर्ष पूर्व रोम नगर की स्थापना के साथ प्रारंभ हुआ। प्रारंभ में इसमें दस माह का वर्ष होता था, जो मार्च से दिसम्बर तक चलता था तथा 304 दिन होते थे। बाद में राजा नूमा पिम्पोलियस ने इसमें दो माह Jonu Arius और Februarius जोड़कर वर्ष 12 माह का बनाया तथा इसमें दिन हुए 355, पर आगे के वर्षों में ग्रहीय गति से इनका अंतर बढ़ता गया, तब इसे ठीक 46 बी.सी. करने के लिए जूलियस सीजर ने वर्ष को 365 1/4 दिन का करने हेतु नये कैलेंडर का आदेश दिया तथा उस समय के वर्ष को कहा कि इसमें 445 1/4 दिन होंगे ताकि पूर्व में आया अंतर ठीक हो सके। इसलिए उस वर्ष यानी 46 बी.सी. को इतिहास में संभ्रम का वर्ष (Year of confusion) कहते हैं।


जूलियन_कैलेंडर- जूलियस सीजर ने वर्ष को 365 1/4 दिन का करने के लिए एक व्यवस्था दी। क्रम से 31 व 30 दिन के माह निर्धारित किए तथा फरवरी 29 दिन की। Leap Year में फरवरी भी 30 दिन की कर दी। इसी के साथ इतिहास में अपना नाम अमर करने के लिए उसने वर्ष के सातवें महीने के पुराने नाम Quinitiles को बदलकर अपने नाम पर जुलाई किया, जो 31 दिन का था। बाद में सम्राट आगस्टस हुआ; उसने भी अपना नाम इतिहास में अमर करने हेतु आठवें महीने Sextilis का नाम बदलकर उस माह का नाम अगस्त किया। उस समय अगस्त 30 दिन का होता था पर-“सीजर से मैं छोटा नहीं”, यह दिखाने के लिए फरवरी के माह जो उस समय 29 दिन का होता था जो एक दिन लेकर अगस्त भी 31 दिन का किया। तब से मास और दिन की संख्या वैसी ही चली आ रही है।

ग्रेगोरियन_कैलेंडर – 16वीं सदी में जूलियन कैलेन्डर में 10 दिन बढ़ गए और चर्च फेस्टीवल ईस्टर आदि गड़बड़ आने लगे, तब पोप ग्रेगोरी त्रयोदश ने 1582 के वर्ष में इसे ठीक करने के लिए यह हुक्म जारी किया कि 4 अक्तूबर को आगे 15 अक्तूबर माना जाए। वर्ष का आरम्भ 25 मार्च की बजाय 1 जनवरी से करने को कहा। रोमन कैथोलिकों ने पोप के आदेश को तुरन्त माना, पर प्रोटेस्टेंटों ने धीरे-धीरे माना। ब्रिटेन जूलियन कैलेंडर मानता रहा और 1752 तक उसमें 11 दिन का अंतर आ गया। अत: उसे ठीक करने के लिए 2 सितम्बर के बाद अगला दिन 14 सितम्बर कहा गया। उस समय लोग नारा लगाते थे “Criseus back our 11 days”। इग्लैण्ड के बाद बुल्गारिया ने 1918 में और ग्रीक आर्थोडाक्स चर्च ने 1924 में ग्रेगोरियन कैलेण्डर माना।

हिजरी या #इस्लामी_पंचांग को (अत-तक्वीम-हिज़री ,तकवीम-ए-हिज़री-ये-क़मरी) जिसे हिजरी कालदर्शक भी कहते हैं, एक चंद्र कालदर्शक है, जो न सिर्फ मुस्लिम देशों में प्रयोग होता है बल्कि इसे पूरे विश्व के मुस्लिम भी इस्लामिक धार्मिक पर्वों को मनाने का सही समय जानने के लिए प्रयोग करते हैं। यह चंद्र-कालदर्शक है, जिसमें वर्ष में बारह मास, एवं 354 या 355 दिवस होते हैं। क्योंकि यह सौर कालदर्शक से 11 दिवस छोटा है इसलिए इस्लामी धार्मिक तिथियाँ, जो कि इस कालदर्शक के अनुसार स्थिर तिथियों पर होतीं हैं, परंतु हर वर्ष पिछले सौर कालदर्शक से 11 दिन पीछे हो जाती हैं। इसे हिज्रा या हिज्री भी कहते हैं, क्योंकि इसका पहला वर्ष वह वर्ष है जिसमें कि हज़रत मुहम्मद की मक्का शहर से मदीना की ओर हिज्ऱत (प्रवास) हुई थी। हर वर्ष के साथ वर्ष संख्या के बाद में H जो हिज्र को संदर्भित करता है या AH (लैटिनः अन्नो हेजिरी (हिज्र के वर्ष में) लगाया जाता है।[1]हिज्र से पहले के कुछ वर्ष (BH) का प्रयोग इस्लामिक इतिहास से संबंधित घटनाओं के संदर्भ मे किया जाता है, जैसे मुहम्म्द साहिब का जन्म लिए 53 BH।

वर्तमान हिज्री़ वर्ष है 1442 AH.

Juche_कैलेंडर साउथ कोरिया

ग्रेगोरियन कैलेंडर पर चल रहे एक संशोधित संस्करण कैलेंडर वास्तव में juche कैलेंडर के रूप में जाना जाता है पहला वर्ष नेता किम इल सुंग के जन्म से चला जो वर्ष 1912 में पैदा हुआ था। वर्तमान में वहाँ 110 वाँ साल चल रहा है।

इथियोपियन_कैलेंडर

अफ्रीका (Africa) देश से सटे इस देश का नाम Ethiopia है। इस देश का कैलेंडर दुनिया से 7 साल 3 महीने पीछे चलता है। यह देश बाकी देशों देशों से कई मामले में एकदम अलग है जैसे कि आम तौर पर 1 साल में 12 महीने होते हैं पर इनके यहां 1 साल में 13 महीने होते हैं।
Ethiopia पर रोमन चर्च की छाप भारी रही है मतलब यहां पर उनका अपना ऑर्थोडॉक्स चर्च माना जाता है। Ethiopia में ईसा मसीह का जन्म साथ BC में होता है तो दूसरी तरफ पुरी दुनिया का कैलेंडर बताता है कि ईसा मसीह का जन्म एडी में हुआ। यही कारण है कि यहां का कैलेंडर आज भी 2013 में अटका हुआ है। जबकि सारे देशों में 2021 की शुरुआत हो चुकी है

इथोपियन अपने आखिरी महीने को Pagume कहते हैं इसमें 5 या 6 दिन ही होते हैं यह महीने साल में उन दिनों की याद में जोड़ा जाता है जो किसी कारण साल की गिनती में नहीं आते हालांकि इस कारण से वहां पर आए सैलानियों किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।
यह 6 अक्टूबर, 3761 ई.पू. से माना जाता है वर्तमान में 5780वाँ वर्ष चल रहा है।

इस गणना को 12 वीं शताब्दी में Maimonides द्वारा स्थापित किया गया था, पिछली प्रणाली के अनुसार यहूदियों ने पहले इस्तेमाल किया था, जो 70 CE में मंदिर के विनाश से गिना गया था।

इज़राइलकाआधिकारिककैलेंडरहिब्रू एक है। कानून के तहत, इजरायल के आधिकारिक दस्तावेजों में उन पर हिब्रू तारीख होनी चाहिए। इसके अलावा, इसराइल में छुट्टियां यहूदी कैलेंडर के अनुसार निर्धारित की जाती हैं, ग्रेगोरियन एक नहीं। इस प्रकार एक दिया हुआ त्यौहार, रोश हशनाह – यहूदी प्रतिवाद के अनुसार हर साल एक ही तारीख को होगा, लेकिन ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार हर साल एक अलग दिन। ऐसा इसलिए है क्योंकि ग्रेगोरियन और यहूदी कैलेंडर मेल नहीं खाते हैं।

यहां तक ​​कि इसराइल में नागरिक छुट्टियां, जैसे कि यरूशलेम दिवस, यहूदी कैलेंडर पर आधारित हैं।

फिर भी अपने दिन-प्रतिदिन के जीवन में, अधिकांश इज़राइली हिब्रू तारीख से पूरी तरह से अनजान हैं और ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार अपने जीवन का नेतृत्व करते हैं। उस ने कहा, एक गैर-धार्मिक धार्मिक अल्पसंख्यक अभी भी पुराने के हिब्रू कैलेंडर का पालन नहीं करता है।

हिब्रू_कैलेंडर बहुत जटिल है, क्योंकि इसमें चंद्र वर्ष (365 दिन, 5 घंटे, 48 मिनट और 46 सेकंड) को चंद्र वर्ष (12 महीने 29 दिन, 12 घंटे, 44 मिनट और 3 सेकंड) के साथ संरेखित करना होता है।

इसका मतलब है कि इसे इस तथ्य के लिए भत्ता बनाना होगा कि 12 चंद्र महीने सौर वर्ष की तुलना में लगभग 12 दिन कम हैं। यह आसान नहीं है।

सबसे प्राचीन लोगों की तरह, सबसे पहले यहूदियों ने कड़ाई से चंद्र कैलेंडर का पालन किया। इसका सबसे पहला रिकॉर्ड 10 वीं शताब्दी ईसा पूर्व का है, जो कैनाईट शहर के गीज़र (येरुशलम और तेल अवीव के बीच का) में पाया जाता है।

हालांकि
Saudi Arabia
Japan
Iran
Israel
Ethiopia
Thailand
North Korea
का अपना-अपना अलग कैलेंडर है। लेकिन अधिकतर देशों में ग्रोगेरियन कैलेंडर माना जाता है।

चिल्ड्रन्स ब्रिटानिका Vol 3-1964 में कैलेंडर के संदर्भ में उसके संक्षिप्त इतिहास का वर्णन किया गया है ।

English translation

foreign_calendar.

#Calendar means the method of division of time – on the basis of year, month, day, based on the motion of the earth and the motion of the moon. The word for Moon in Latin is Luna, hence it is called Lunar Month. Sol is the word for Sun in Latin, hence the year is called Solar Year. Nowadays its measurement is 365 days 5 hours 48 minutes and 46 seconds. Since the solar year and the lunar month are not in sync, there was a mess in many countries.

To divide time on the basis of historical event. Christians believe that the birth of Christ is a decisive event in history, on the basis of which they divide history into two parts. a B.C. And the second A.D. B.C. Means Before Christ – it applies to the events before the birth of Christ. The events that happened after the birth of Jesus were attributed to A.D. It is said which means Anno Domini i.e. In the year of our Lord. It is a different matter that this method was not used for a few centuries after the birth of Christ.

#Roman_Calendar – Today’s E. The origin of the year is the Roman era, which began with the establishment of the city of Rome 753 years before the birth of Christ. Initially, it had a ten-month year, which lasted from March to December and had 304 days. Later, King Numa Pimpolius made the year 12 months by adding two months Jonu Arius and Februarius to it and the days were 355, but in subsequent years their difference increased due to planetary motion, then it was called exactly 46 B.C. To do this, Julius Caesar ordered a new calendar to make the year 365 1/4 days and told the year at that time that it would have 445 1/4 days so that the difference in the earlier could be corrected. So that year i.e. 46 B.C. year of confusion in history
,
#Julian_Calendar – Julius Caesar gave an arrangement to make the year 365 1/4 days. Determined the months of 31 and 30 days in sequence and February for 29 days. February also made 30 days in the Leap Year. Simultaneously, to immortalize his name in history, he changed the old name of the seventh month of the year, Quinitiles, to July, which was 31 days. Later the emperor became Augustus; He also changed the name of the eighth month Sextilis to August in order to immortalize his name in history. At that time, August was 30 days, but to show “I am not younger than Caesar”, the month of February, which was 29 days at that time, took one day to 31 days. Since then the number of months and days has remained the same.

#GregorianCalendar – In the 16th century, the Julian calendar increased by 10 days and the church festival Easter etc. Asked to start the year from 1st January instead of 25th March. Roman Catholics obeyed the pope’s orders immediately, but Protestants obeyed slowly. Britain continued to follow the Julian calendar and by 1752 there was a difference of 11 days. Therefore, to correct it, the next day after 2nd September was called 14th September. At that time people used to shout “Criseus back our 11 days”. After England, Bulgaria adopted the Gregorian calendar in 1918 and the Greek Orthodox Church in 1924.

Hijri or the Islamic calendar (At-Taqwim-Hijri, Takvim-e-Hijri-ye-Qamri) also known as Hijri Kaldarshak, is a lunar calendar, which is used not only in Muslim countries, but it is also used by Muslims all over the world. Also use to know the right time to celebrate Islamic religious festivals. It is Chandra-Kaldarshak, in which there are twelve months in a year, and 354 or 355 days. Because it is 11 days shorter than the solar calendar, Islamic religious dates, which are fixed dates according to this calendar, but fall behind the previous solar calendar by 11 days every year. It is also called Hijra or Hijri, because its first year is the year in which Muhammad had hijt (migration) from the city of Mecca to Medina. Each year is followed by the year number H which refers to the Hijr or AH (Latin: Anno Hejiri (in the year of the Hijra) is put.[1] The few years before the Hijra (BH) are used related to Islamic history. It is done in the context of events, such as the birth of Muhammad Sahib in 53 BH.
The current Hijri year is 1442 AH.

#Juche_Calendar South Korea
A modified version of the calendar running on the Gregorian calendar is actually known as the juche calendar; the first year followed the birth of leader Kim Il Sung who was born in the year 1912. Presently there is 110th year going on.

#Ethiopian_Calendar
The name of this country adjacent to the country of Africa is Ethiopia. The calendar of this country runs behind the world by 7 years and 3 months. This country is very different from the rest of the countries in many respects such as there are usually 12 months in a year but they have 13 months in 1 year.
Ethiopia has been heavily influenced by the Roman Church, meaning that it is considered to have its own Orthodox Church. In Ethiopia, the birth of Jesus Christ occurs simultaneously in BC, on the other hand the calendar of the whole world tells that Jesus Christ was born in AD. This is the reason that the calendar here is still stuck in 2013. While 2021 has started in all countries

Ethiopians call their last month as Pagume, it has only 5 or 6 days, this month is added to the memory of those days in the year, which for some reason do not count in the year, although due to this reason the tourists who came there had to face any kind of trouble. do not have to face.
This was on October 6, 3761 BC. It is believed that the 5780th year is going on at present.

This count was established by Maimonides in the 12th century, following the previous system previously used by the Jews, which counted from the destruction of the Temple in 70 CE.

#Israel_ka_official_calendar_Hebrew is one. Under the law, official Israeli documents must have a Hebrew date on them. Furthermore, holidays in Israel are scheduled according to the Jewish calendar, not the Gregorian one. Thus a given festival, Rosh Hashanah – would take place on the same date each year according to Jewish counterculture, but on a different day each year according to the Gregorian calendar. This is because the Gregorian and Jewish calendars do not coincide.

Even civil holidays in Israel, such as Jerusalem Day, are based on the Jewish calendar.

Yet in their day-to-day lives, most Israelis are completely unaware of the Hebrew date and lead their lives according to the Gregorian calendar. That said, a nonreligious religious minority still does not follow the Hebrew calendar of old.

The Hebrew calendar is very complex, as it has to align the lunar year (365 days, 5 hours, 48 ​​minutes and 46 seconds) with the lunar year (12 months 29 days, 12 hours, 44 minutes and 3 seconds).

This means that it has to make allowance for the fact that the 12 lunar months are about 12 days shorter than the solar year. It’s not easy.

Like most ancient peoples, the earliest Jews strictly followed the lunar calendar. The earliest records of it date back to the 10th century BC, found in a geyser in the city of Kainait (between Jerusalem and Tel Aviv).

although
Saudi Arabia
Japan
Iran
Israel
Ethiopia
Thailand
North Korea
It has its own separate calendar. But in most countries, the Gregorian calendar is considered.

Children’s Britannica Vol 3-1964 gives a brief history of the calendar in its context.

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