HINDUISM AND SANATAN DHARMA

Hinduism,Cosmos ,Sanatan Dharma.Ancient Hinduism science.

Om Mantra- A guide to wake up

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ॐ ( जाप ) उच्चारण का मन्त्र नहीं है।
ॐ श्रवण ( सुनने ) का मन्त्र है। ॐ की ध्वनि स्वत: ही सृष्टि में उच्चरित हो रही है, इसे सुनने का प्रयत्न करें। ॐ को अनहत नाद कहतें हैं, अनहत नाद यानी जो बिना किसी दो माध्यमों के स्वत: ही उत्पन्न हो। फिर इसे उच्चारित करके इसे कृत्रिम क्यों बनाया जाए। जो शाश्वत हो उसे शाश्वत हीं रहने दिया जाए। आधी रात को तकरीबन 12 से 1 बजे जब रात्री बिलकुल शांत हो, आराम से पालथी मार कर बैठ जाएँ। रात्री की सनसनाहट को महसूस करें। अपना सारा ध्यान सुनने के ऊपर लगा दें। शत प्रतिशत सुनने का प्रयास करें, कुछ और न करें। आधा एक घंटा रोज ये प्रयोग करें।
ॐ हूँ आनंद हूँ ब्रह्म सच्चिदानंद हूँ।

🔴 ॐ से सम्बन्धित कुछ बातें !🕉

🕉1) ओंकार का ध्यान करते समय कमर सीधी रहे यानि मेरु दंड उन्नत रहे।

🕉(2) दृष्टी भ्रूमध्य में रहे। जो उन्नत साधक है उनकी दृष्टी भ्रूमध्य और सहस्त्रार पर एक साथ रहे।

🕉(3) आसन ऊनी हो जिस पर एक रेशम का वस्त्र विछा हो।

🕉(4) मुँह पूर्व या उत्तर दिशा में हो।

🕉(5) जो दायें हाथ से लिखते हैं उनको दायें कान में व जो बाएँ हाथ से लिखते हैं उनको बाँयें कान में ओंकार की ध्वनी सुनेगी। कुछ समय पश्चात ओंकार की ध्वनी खोपड़ी के पीछे के भाग, शिखास्थान से नीचे, मेरुशीर्ष (medulla) जहां मस्तिष्क से मेरुदंड की नाड़ियाँ मिलती हैं, वहाँ सुननी आरम्भ हो जायेंगी और उसका विस्तार सारे ब्रह्माण्ड में होने लगेगा। एक विराट ज्योति का प्रादुर्भाव भी यहीं से होगा, जो भ्रूमध्य में प्रतिबिंबित होगी। यह मेरुशीर्ष यानि मस्तक ग्रंथि ही वास्तविक आज्ञाचक्र है। भ्रूमध्य तो दर्पण की तरह है जहाँ गुरु की आज्ञा से ध्यान करते हैं।

🕉(6) आरम्भ में लकड़ी के “T” के आकार के लकड़ी के एक हत्थे को सामने रखकर उस पर अपनी कोहनियाँ टिका दें, अंगूठों से कान बंद कर लें और ओंकार की ध्वनी को सुनें। साथ साथ मानसिक रूप से ओ३म् ओ३म् ओ३म् का जाप करते रहें। “ॐ” यह लिखने में प्रतीकात्मक है, और “ओ३म्” यह ध्वन्यात्मक है। इस की लिखावट पर कोई विवाद ना करें। महत्व उस का है जो सुनाई देता है, न कि कैसे लिखा गया है।

🕉(7) कुछ धर्मगुरुओं के अनुसार ॐ के जाप का अधिकार मात्र सन्यासियों को है, गृहस्थों को नहीं। गृहस्थ ॐ के साथ भगवान के अन्य किसी नाम का सम्पुट लगाएँ। पर मैं इस विवाद में नहीं पड़ना चाहता क्योंकि यह वेद विरुद्ध है। सारे उपनिषद और भगवद्गीता “ओंकार’ की महिमा से भरे पड़े हैं। जो उपनिषदों में यानि वेदों में है वही प्रमाण है, वही मान्य है। जो वेदविरुद्ध है वह अमान्य है।

🕉(8) भ्रूमध्य में ज्योतिर्मय ब्रह्म के दर्शन, और कानों से ओंकार की ध्वनी यानि नादब्रह्म को सुनते रहें व मन में ओंकार का जप करते रहें। किसी भी तरह के वाद-विवाद में ना पड़ें। आपका लक्ष्य परमात्मा है, ना कि कोई सिद्धांत या बौद्धिकता।

🕉(9) उपरोक्त साधना की सफलता एक ही तथ्य पर निर्भर है की आपके ह्रदय में कितनी भक्ति है। बिना भक्ति के कोई लाभ नहीं होगा और आप कुछ कर भी नहीं पाएँगे। जितनी गहरी भक्ति होगी उतनी ही अच्छी साधना होगी, उतना ही गहरा समर्पण होगा। कर्ताभाव ना आने दें। सब कुछ प्रभु के चरणों में समर्पित कर दें। कर्ता भी वे ही है और भोक्ता भी वे हैं। आप तो उनके एक उपकरण मात्र हैं। अपना सब कुछ, अपना सम्पूर्ण अस्तित्व उन्हें समर्पित कर दें। इसकी इतनी महिमा है की उसे बताने की सामर्थ्य मेरी क्षमता से परे है

English translation-

The

Om (Jap) is not a mantra to be chanted.
Om is the mantra of Shravan (listening). The sound of Om is automatically being recited in the universe, try to hear it. Om is called anahata naad, anahata naad i.e. that which arises automatically without any two mediums. Then why make it artificial by pronouncing it. What is eternal should be allowed to remain eternal. At about 12 to 1 o’clock in the middle of the night, when the night is completely calm, sit comfortably with a cross. Feel the sensation of the night. Put all your attention on listening. Try listening 100 percent, don’t do anything else. Use this for half an hour daily.
Om am Anand, I am Brahma Satchidananda.

Some things related to !🕉

1) While meditating on Omkar, the waist should be straight, that is, the spine should be advanced.

(2) Drishti should remain in the middle of the earth. Those who are advanced seekers, their eyes should be on the earth and the Sahastrar together.

(3) The seat should be woolen, on which a silk cloth is spread.

(4) The face should be in the east or north direction.

(5) Those who write with the right hand will hear the sound of Omkar in the right ear and those who write with the left hand will hear the sound of Omkar in the left ear. After some time the sound of Omkar will start to be heard in the back part of the skull, below the crest, the medulla, where the spinal nerves meet with the brain, and it will start spreading in the whole universe. A colossal light will also emerge from here, which will be reflected in the equator. This Merushirsha i.e. the head gland is the real command wheel. The middle of the brow is like a mirror where we meditate with the Guru’s orders.

(6) In the beginning, put a wooden “T” shaped wooden handle in front and rest your elbows on it, close the ears with the thumbs and listen to the sound of Omkar. Simultaneously keep chanting O3M O3M Om3M mentally. “ॐ” is symbolic in writing, and “o3am” is phonetic. Do not dispute the writing of this. What matters is what is heard, not how it is written.

(7) According to some religious leaders, the right to chant Om is only for the sannyasis, not the householders. Along with the householder Om, apply some other name of God. But I do not want to get into this controversy because it is against the Vedas. All the Upanishads and Bhagavad Gita are filled with the glory of “Omkar”. Whatever is in the Upanishads, that is, in the Vedas, is the only proof, that is valid. The one who is against the Vedas is invalid.

(8) In the middle of the brow, keep seeing the light of Brahma, and listening to the sound of Omkar i.e. Naad Brahm with the ears and keep chanting Omkar in the mind. Don’t get into any kind of argument. Your goal is God, not a theory or an intellectual.

(9) The success of the above mentioned sadhana is dependent on the same fact that how much devotion is there in your heart. Without devotion there will be no benefit and you will not be able to do anything. The deeper the devotion, the better the sadhana will be, the deeper will be the surrender. Don’t let the doer come. Surrender everything at the feet of the Lord. He is the doer and he is also the enjoyer. You are just his tool. Surrender your everything, your whole being to Him. It’s so great that it’s beyond my ability to tell

One comment on “Om Mantra- A guide to wake up

  1. Pingback: Om Mantra- A guide to wake up - GETS STUDY

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